tum jo daaman zaraa bhigo lete | तुम जो दामन ज़रा भिगो लेते

  - Rabia Basri
तुमजोदामनज़राभिगोलेते
हमभीकुछदेरखुलकेरोलेते
इकतिरीयादजोहमारीथी
इकतिरादर्दजोबिछोलेते
आलम-ए-मस्ती-ओ-तरबमेंरहे
ख़ाककीतीरगीमेंसोलेते
हर्फ़ख़ुशबूकेरंगमेंलिखती
फूलगजरोंमेंजोपिरोलेते
ना-रसाईतोख़ैरक़िस्मतथी
औरक्याबचगयाजोखोलेते
कूँजकरलारहीथीसहरामें
आब-ओ-दानावहाँभीबोलेते
मिटरहीहूँरह-ए-हज़ीमतमें
अपनेहाथोंसेहीडुबोलेते
रातकीशालओढ़करयूँँहम
रेग-ए-राह-ए-रवाँहीहोलेते
साँसअपनीमहकमहकजाती
हाथसेफूलतेरेजोलेते
  - Rabia Basri
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