k | कितना रोका मगर रुका ही नहीं

  - Rabia Basri
कितनारोकामगररुकाहीनहीं
औरमुड़करतोदेखताहीनहीं
तेरीचौखटकाभारीदरवाज़ा
दस्तकेंदेकेभीखुलाहीनहीं
मुझमेंइतनाबिखरगयाहैवो
लाखचाहूँसिमटरहाहीनहीं
साहिबादोस्तमानरक्खाथा
औरतूदुखमेंबोलताहीनहीं
हिज्रनेख़ुदभीयेगवाहीदी
वापसीकातोरास्ताहीनहीं
कुंज-ए-तन्हाईमेंअसीर-ए-इश्क़
ख़ुदसेबाहरकभीगयाहीनहीं
एकमुद्दतसेआश्नाहैंमगर
आइनेसेमुकालिमाहीनहीं
किसमोहब्बतकीबातकरतेहो
जिसमोहब्बतमेंदिलजलाहीनहीं
किसकोइतनामक़ामदेतेहम
इतनाअच्छाकोईलगाहीनहीं
कुछतोहोताकिज़िंदगीकरते
इसत'अल्लुक़काकुछसिलाहीनहीं
सारीदुनियाशुमारबैठीहूँ
या'नीगिनतीमें'राबिया'हीनहीं
  - Rabia Basri
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