haalaat ab sanwarne ke aasaar bhi nahin | हालात अब सँवरने के आसार भी नहीं

  - Qamar Rais Bahraichi
हालातअबसँवरनेकेआसारभीनहीं
ग़मबे-शुमारहैंकोईग़म-ख़्वारभीनहीं
क्याक्यालिखूँमैंशहर-ए-सितमकीरिवायतें
इकदूसरेकाकोईमदद-गारभीनहीं
कश्तीकामेरीयारोनिगहबाँहैकोईऔर
हाथोंमेंमेरेइसलिएपतवारभीनहीं
किसकेक़दमकोचूमूँकिसेपारसाकहूँ
हरशख़्सअबतोसाहिब-ए-किरदारभीनहीं
शैख़तेरीबातअजीब-ओ-ग़रीबहै
भीगेहैंहोंटऔरगुनाहगारभीनहीं
मैंकैसेमानलूँवोमसीहा-ए-वक़्तहै
किरदारउसकालाएक़-ए-दस्तारभीनहीं
उसकेलिएदुआएँमाँगीकहाँकहाँ
लेकिन'क़मर'वोमेरातलबगारभीनहीं
  - Qamar Rais Bahraichi
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