kaisi chali hawa ki ghatta gham ki chha gaii | कैसी चली हवा कि घटा ग़म की छा गई

  - Qamar Rais Bahraichi
कैसीचलीहवाकिघटाग़मकीछागई
रौशनथाइकचराग़मोहब्बतबुझागई
क्याजानेउसकेदरपेक्यूँइतनासुकूनथा
वहशतकेबावजूदमुझेनींदगई
मुद्दतसेअपनेआपमेंबिखराहुआथामैं
दुनियामिरेवजूदमेंकैसेसमागई
अपनोंकेदरमियाँभीघुटनसेलगीमुझे
रिश्तोंकीजुस्तुजूयेकहाँलेकेगई
जबतककिसरहमारारहारौशनीरही
नेज़ेपेउसकेबादउदासीसीछागई
कलतकतोएहतिजाजतुम्हारेलहूमेंथा
यारोयेकैसेदुनियातुम्हेंरासगई
हैरतसेदेखतीरहीमुझकोज़मीं'क़मर'
मिट्टीकोमेरीअर्शपेलेकरहवागई
  - Qamar Rais Bahraichi
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