tum usii ko vajh-e-tarab kaho ham usii ko ba'is-e-gham kahein | तुम उसी को वज्ह-ए-तरब कहो हम उसी को बाइ'स-ए-ग़म कहें

  - Qamar Moradabadi
तुमउसीकोवज्ह-ए-तरबकहोहमउसीकोबाइ'स-ए-ग़मकहें
वहीइकफ़साना-ए-इश्क़हैकभीतुमकहोकभीहमकहें
कभीज़िक्र-ए-मेहर-ओ-वफ़ाकरेंकभीदास्तान-ए-अलमकहें
बड़ेए'तिमादसेवोसुनेंबड़ेए'तिमादसेहमकहें
जिसेइंक़लाबछूसकाउसेतूनेख़ुदहीमिटादिया
वहीएकदिलकासनम-कदाजिसेआबरू-ए-हरमकहें
वहीदिल-ख़राशसीइकनज़रजोब-क़द्र-ए-ज़ौक़हैनेश्तर
उसेकोईतर्ज़-ए-सितमकहेहमअदा-ए-पुर्सिश-ए-ग़मकहें
तुझेयेख़बरनहींसाक़ियाकिहैमय-कशोंकामक़ामक्या
येउन्हींकीवुसअ'त-ए-क़ल्बहैकिख़ुदअपनेज़र्फ़कोकमकहें
हमा-आरज़ूहमा-बे-खु़दीहमा-बंदगीहमा-बे-कसी
यहीचंदलम्होंकीज़िंदगीइसेक्यूँँफ़ुर्सत-ए-ग़मकहें
'क़मर'इससेहमकोग़रज़हीक्याहैसभीसेउसकामोआ'मला
जोख़ुदाकहेंवोख़ुदाकहेंजोसनमकहेंवोसनमकहें
  - Qamar Moradabadi
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