saaqiya tanj na kar chashm-e-karam rahne de | साक़िया तंज़ न कर चश्म-ए-करम रहने दे

  - Qamar Moradabadi
साक़ियातंज़करचश्म-ए-करमरहनेदे
मेरेसाग़रमेंअगरकमहैतोकमरहनेदे
इश्क़-ए-आवाराकोमहरूम-ए-करमरहनेदे
अपनेमाथेपेशिकनज़ुल्फ़मेंख़मरहनेदे
तूज़मानेकोमिटाताहैमिटादेलेकिनइश्क़कीराहमेंकुछनक़्श-ए-क़दमरहनेदे
मेरेउलझेहुएहालातग़नीमतहैंमुझे
दिलकीबातोंमेंपुर्सिश-ए-ग़मरहनेदे
आशियाँफूँककेतकमील-ए-चराग़ाँकरदे
फ़स्ल-ए-गुलआईहैगुलशनकाभरमरहनेदे
ज़िंदगीग़मसेसँवरतीहैनिखरतीहैक़मर
ज़िंदगीकोयूँँहीआलूदा-ए-ग़मरहनेदे
  - Qamar Moradabadi
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