shahar ki galiyaan ghoom rahi hain mere qadam ke saath | शहर की गलियाँ घूम रही हैं मेरे क़दम के साथ

  - Qamar Jameel
शहरकीगलियाँघूमरहीहैंमेरेक़दमकेसाथ
ऐसेसफ़रमेंइतनीथकनमेंकैसेकटेगीरात
ख़्वाबमेंजैसेघरसेनिकलकेघूमरहाहोकोई
रातमेंअक्सरयूँँभीफिरीहैतेरेलिएइकज़ात
चंदबगूलेख़ुश्कज़मींपरऔरहवाएँतेज़
इससहरामेंकैसीबहारेंकैसीभरीबरसात
धूममचाएँबस्तीबस्तीसोचरहेथेआप
देखाकिनकिनवीरानोंमेंलेकेगएहालात
दिनमेंक़यामतग़म-ख़्वारोंकीरातमेंयाद-ए-यार
चंदनफ़सकीमोहलतमेंभीइतनेकठिनदिनरात
  - Qamar Jameel
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