ek patthar ki dast-e-yaar men hai | एक पत्थर कि दस्त-ए-यार में है

  - Qamar Jameel
एकपत्थरकिदस्त-ए-यारमेंहै
फूलबननेकेइंतिज़ारमेंहै
अपनीनाकामियोंपेआख़िर-ए-कार
मुस्कुरानातोइख़्तियारमेंहै
हमसितारोंकीतरहडूबगए
दिनक़यामतकेइंतिज़ारमेंहै
अपनीतस्वीरखींचताहूँमैं
औरआईनाइंतिज़ारमेंहै
कुछसितारेहैंऔरहमहैं'जमील'
रौशनीजिनसेरहगुज़ारमेंहै
  - Qamar Jameel
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