jaane do in nagmon ko aahang-e-shikast-e-saaz na samjho | जाने दो इन नग़्मों को आहंग-ए-शिकस्त-ए-साज़ न समझो

  - Qamar Jameel
जानेदोइननग़्मोंकोआहंग-ए-शिकस्त-ए-साज़समझो
दर्द-भरीआवाज़तोसुनलोदर्द-भरीआवाज़समझो
जाओबहारोजाओजाओवीरानोंकेपासआओ
आलम-ए-शौक़-ए-आसूदाकोहसरतकाग़म्माज़समझो
ज़ख़्मलगानाआताहैइनफूलोंसेनाज़ुकलोगोंकोभी
बेहतरहैइनफूलसेनाज़ुकलोगोंकेअंदाज़समझो
ख़ामोशीकेसहराओंमेंभटकेहुएसंगीतजानो
तार-ए-नफ़सकेनग़्मेंहैंयेइनकोमिरीआवाज़समझो
  - Qamar Jameel
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