ye dard-e-hijr aur is par sehar nahin hoti | ये दर्द-ए-हिज्र और इस पर सहर नहीं होती

  - Qamar Jalalvi
येदर्द-ए-हिज्रऔरइसपरसहरनहींहोती
कहींइधरकीतोदुनियाउधरनहींहोती
होरिहाईक़फ़ससेअगरनहींहोती
निगाह-ए-शौक़तोबे-बाल-ओ-परनहींहोती
सताएजाओनहींकोईपूछनेवाला
मिटाएजाओकिसीकोख़बरनहींहोती
निगाह-ए-बर्क़अलावामिरेनशेमनके
चमनकीऔरकिसीशाख़परनहींहोती
क़फ़समेंख़ौफ़हैसय्यादकाबर्क़काडर
कभीयेबातनसीबअपनेघरनहींहोती
मनानेआएहोदुनियामेंजबसेरूठगया
येऐसीबातहैजोदरगुज़रनहींहोती
फिरूंगाहश्रमेंकिसकिससेपूछतातुमको
वहाँकिसीकोकिसीकीख़बरनहींहोती
किसीग़रीबकेनालेहैंआपक्यूँँचौंके
हुज़ूरशबकोअज़ान-ए-सहरनहींहोती
येमानाआपक़समखारहेहैंवा'दोंपर
दिल-ए-हज़ींकोतसल्लीमगरनहींहोती
तुम्हींदुआएँकरोकुछमरीज़-ए-ग़मकेलिए
किअबकिसीकीदु'आकार-गरनहींहोती
बसआजरातकोतीमारदारसोजाएँ
मरीज़अबकहेगासहरनहींहोती
'क़मर'येशाम-ए-फ़िराक़औरइज़तिराब-ए-सहर
अभीतोचार-पहरतकसहरनहींहोती
  - Qamar Jalalvi
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