karte bhi kya huzoor na jab apne ghar mile | करते भी क्या हुज़ूर न जब अपने घर मिले

  - Qamar Jalalvi
करतेभीक्याहुज़ूरजबअपनेघरमिले
दुश्मनसेहमकभीमिलेथेमगरमिले
बुलबुलपेऐसीबर्क़गिरीआँधियोंकेसाथ
घरकापताचलाकहींबाल-ओ-परमिले
उनसेहमेंनिगाह-ए-करमकीउमीदक्या
आँखेंनिकाललेंजोनज़रसेनज़रमिले
वा'दाग़लतपतेभीबताएहुएग़लत
तुमअपनेघरमिलेरक़ीबोंकेघरमिले
अफ़्सोसहैयहीमुझेफ़स्ल-ए-बहारमें
मेराचमनहोऔरमुझीकोघरमिले
चारोंतरफ़हैशम-ए-मोहब्बतकीरौशनी
परवानेढूँडढूँडकेलाईजिधरमिले
  - Qamar Jalalvi
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