bala se ho shaam ki siyaahi kahii to manzil mirii milegi | बला से हो शाम की सियाही कहीं तो मंज़िल मिरी मिलेगी

  - Qamar Jalalvi
बलासेहोशामकीसियाहीकहींतोमंज़िलमिरीमिलेगी
उधरअँधेरेमेंचलपड़ूँगाजिधरमुझेरौशनीमिलेगी
हुजूम-ए-महशरमेंकैसामिलनानज़र-फ़रेबीबड़ीमिलेगी
किसीसेसूरततिरीमिलेगीकिसीसेसूरतमिरीमिलेगी
तुम्हारीफ़ुर्क़तमेंतंगकरयेमरनेवालोंकाफ़ैसलाहै
क़ज़ासेजोहम-कनारहोगाउसेनईज़िंदगीमिलेगी
क़फ़ससेजबछुटकेजाएँगेहमतोसबमिलेंगेब-जुज़-नशेमन
चमनकाएकएकगुलमिलेगाचमनकीइकइककलीमिलेगी
तुम्हारीफ़ुर्क़तमेंक्यामिलेगातुम्हारेमिलनेसेकियामिलेगा
'क़मर'केहोंगेहज़ार-हाग़मरक़ीबकोइकख़ुशीमिलेगी
  - Qamar Jalalvi
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