chhod kar ghar-baar apna hasrat-e-deedaar men | छोड़ कर घर-बार अपना हसरत-ए-दीदार में

  - Qamar Jalalvi
छोड़करघर-बारअपनाहसरत-ए-दीदारमें
इकतमाशाबनकेबैठाहूँकू-ए-यारमें
दमनिकलजाएगाहसरतसेदेखनाख़ुदा
अबमिरीक़िस्मतपेकश्तीछोड़देमंजधारमें
देखभीबातकहनेकेलिएहोजाएगी
सिर्फ़गिनतीकीहैंसाँसेंअबतिरेबीमारमें
फ़स्ल-ए-गुलमेंकिसक़दरमनहूसहैरोनामिरा
मैंनेजबनालेकिएबिजलीगिरीगुलज़ारमें
जलगयामेरानशेमनयेतोमैंनेसुनलिया
बाग़बाँतोख़ैरियतसेहैसबागुलज़ारमें
  - Qamar Jalalvi
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