baarish men ahd tod ke gar may-kashi hui | बारिश में अहद तोड़ के गर मय-कशी हुई

  - Qamar Jalalvi
बारिशमेंअहदतोड़केगरमय-कशीहुई
तौबामरीफिरेगीकहाँभीगतीहुई
पेशआएलाखरंजअगरइकख़ुशीहुई
पर्वरदिगारयेभीकोईज़िंदगीहुई
अच्छातोदोनोंवक़्तमिलेकोसिएहुज़ूर
फिरभीमरीज़-ए-ग़मकीअगरज़िंदगीहुई
अंदलीबअपनेनशेमनकीख़ैरमाँग
बिजलीगईहैसू-ए-चमनदेखतीहुई
देखोचराग़-ए-क़ब्रउसेक्याजवाबदे
आएगीशाम-ए-हिज्रमुझेपूछतीहुई
क़ासिदउन्हींकोजाकेदियाथाहमाराख़त
वोमिलगएथेउनसेकोईबातभीहुई?
जबतककितेरीबज़्ममेंचलतारहेगाजाम
साक़ीरहेगीगर्दिश-ए-दौराँरुकीहुई
मानाकिउनसेरातकावा'दाहै'क़मर'
कैसेवोसकेंगेअगरचाँदनीहुई
  - Qamar Jalalvi
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