tum ko ham khaak-nasheenon ka khayal aane tak | तुम को हम ख़ाक-नशीनों का ख़याल आने तक

  - Qamar Jalalvi
तुमकोहमख़ाक-नशीनोंकाख़यालआनेतक
शहरतोशहरबदलजाएँगेवीरानेतक
देखिएमहफ़िल-ए-साक़ीकानतीजाक्याहो
बातशीशेकीपहुँचनेलगीपैमानेतक
उसजगहबज़्मसाक़ीनेबिठायाहैहमें
हाथफैलाएँतोजातानहींपैमानेतक
सुब्हहोतीनहींइश्क़येकैसीशबहै
क़ैसफ़रहादकेदोहरालिएअफ़्सानेतक
फिरतूफ़ानउठेंगेगिरेगीबिजली
येहवादिसहैंग़रीबोंहीकेमिटजानेतक
मैंनेहर-चंदबलाटालनीचाहीलेकिन
शैख़नेसाथछोड़ामिरामय-ख़ानेतक
वोभीक्यादिनथेकिघरसेकहींजातेहीथे
औरगएभीतोफ़क़तशामकोमय-ख़ानेतक
मैंवहाँकैसेहक़ीक़तकोसलामतरक्खूँ
जिसजगहरद्द-ओ-बदलहोगएअफ़्सानेतक
बाग़बाँफ़स्ल-ए-बहारआनेपेवा'दातोक़ुबूल
औरअगरहमरहेफ़स्ल-ए-बहारआनेतक
औरतोक्याकहूँशैख़तिरीहिम्मतपर
कोईकाफ़िरहीगयाहोतिरेमय-ख़ानेतक
'क़मर'शामकावा'दाहैवोआतेहोंगे
शामकहलातीहैतारोंकेनिकलआनेतक
क़मरसुब्हहुईअबतोउठोमहफ़िलसे
शम्अ'गुलहोगईरुख़्सतहुएपरवानेतक
  - Qamar Jalalvi
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