karenge shikwa-e-jaur-o-jafaa dil khol kar apna | करेंगे शिकवा-ए-जौर-ओ-जफ़ा दिल खोल कर अपना

  - Qamar Jalalvi
करेंगेशिकवा-ए-जौर-ओ-जफ़ादिलखोलकरअपना
कियेमैदान-ए-महशरहैघरउनकाघरअपना
मकाँदेखाकिएमुड़मुड़केता-हद्द-ए-नज़रअपना
जोबसचलतातोलेआतेक़फ़समेंघरकाघरअपना
बहेजबआँखसेआँसूबढ़ासोज़-ए-जिगरअपना
हमेशामेंहबरसतेमेंजलाकरताहैघरअपना
पसीनाअश्कहसरतबे-क़रारीआख़िरीहिचकी
इकट्ठाकररहाहूँआजसामान-ए-सफ़रअपना
येशबकाख़्वाबया-रबफ़स्ल-ए-गुलमेंसचहोजाए
क़फ़सकेसामनेजलतेहुएदेखाहैघरअपना
दम-ए-आख़िरइलाज-ए-सोज़-ए-ग़मकहनेकीबातेंहैं
मिरारस्तारोकेंरास्तालेंचारा-गरअपना
निशानात-ए-जबींजोश-ए-अक़ीदतख़ुदबतादेंगे
पूछोमुझसेसज्देजाकेदेखोसंग-ए-दरअपना
जवाब-ए-ख़तकाउनकेसामनेकबहोशरहताहै
बतातेहैंपतामेरेबजाएनामा-बरअपना
मुझेक़ब्रदुनियाचैनसेरहनेनहींदेती
चलाआयाहूँइतनीबातपरघरछोड़करअपना
शिकन-आलूदबिस्तरहरशिकनपरख़ूनकेधब्बे
येहाल-ए-शाम-ए-ग़मलिक्खाहैहमनेता-सहरअपना
यहीतीर-ए-नज़रतोहैंमिरेदिलमेंहसीनोंके
जोपहचानोतोलोपहचानलोतीर-ए-नज़रअपना
'क़मर'उनकोआनाथाआएसुब्हहोनेतक
शब-ए-व'अदासजातेहीरहेघररातभरअपना
ज़मींमुझसेमुनव्वरआसमाँरौशनमिरेदमसे
ख़ुदाकेफ़ज़्लसेदोनोंजगहक़ब्ज़ा'क़मर'अपना
  - Qamar Jalalvi
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