ab mujhe gulshan se kya jab zer-e-daam aa hi gaya | अब मुझे गुलशन से क्या जब ज़ेर-ए-दाम आ ही गया

  - Qamar Jalalvi
अबमुझेगुलशनसेक्याजबज़ेर-ए-दामहीगया
इकनशेमनथासोवोबिजलीकेकामहीगया
सुनमआल-ए-सोज़-ए-उल्फ़तजबयेनामहीगया
शम्अआख़िरजल-बुझीपरवानाकामहीगया
तालिब-ए-दीदारकाइसरारकामहीगया
सामनेकोईब-हुस्न-ए-इंतिज़ामहीगया
कोशिश-ए-मंज़िलसेतोअच्छीरहीदीवानगी
चलते-फिरतेउनसेमिलनेकामक़ामहीगया
राज़-ए-उल्फ़तमरनेवालेनेछुपायातोबहुत
दमनिकलतेवक़्तलबपरउनकानामहीगया
करदियामशहूरपर्देमेंतुझेज़हमतदी
आजकोहोनाहमारातेरेकामहीगया
जबउठासाक़ीतोवाइज़कीकुछभीचलसकी
मेरीक़िस्मतकीतरहगर्दिशमेंजामहीगया
हुस्नकोभीइश्क़कीज़िदरखनीपड़तीहैकभी
तूरपरमूसासेमिलनेकापयामहीगया
देरतकबाब-ए-हरमपररुककेइकमजबूर-ए-इश्क़
सू-ए-बुत-ख़ानाख़ुदाकालेकेनामहीगया
रातभरमाँगीदु'आउनकेजानेकी'क़मर'
सुब्हकातारामगरलेकरपयामहीगया
  - Qamar Jalalvi
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