mujhe baagbaan se gilaa ye hai ki chaman se be-khabri rahi | मुझे बाग़बाँ से गिला ये है कि चमन से बे-ख़बरी रही

  - Qamar Jalalvi
मुझेबाग़बाँसेगिलायेहैकिचमनसेबे-ख़बरीरही
किहैनख़्ल-ए-गुलकातोज़िक्रक्याकोईशाख़तकहरीरही
मिराहालदेखकेसाक़ियाकोईबादा-ख़्वारपीसका
तिरेजामख़ालीहोसकेमिरीचश्म-ए-तरभरीरही
मैंक़फ़सकोतोड़केक्याकरूँँमुझेरातदिनयेख़यालहै
येबहारभीयूँँहीजाएगीजोयहीशिकस्ता-परीरही
मुझेअलमतेरेजमालकाख़बरहैतेरेजलालकी
येकलीमजानेकितूरपरतिरीकैसीजल्वागरीरही
मैंअज़लसेआयातोक्यामिलाजोमैंजाऊँगातोमिलेगाक्या
मिरीजबभीदर-ब-दरीरहीमिरीअबभीदर-ब-दरीरही
यहीसोचताहूँशब-ए-अलमकिआएवोतोहुआहैक्या
वहाँजासकीमिरीफ़ुग़ाँकिफ़ुग़ाँकीबे-असरीरही
शब-ए-व'अदावोजोसकेतो'क़मर'कहूँगायेचर्ख़से
तिरेतारेभीगएराएगाँतिरीचाँदनीभीधरीरही
  - Qamar Jalalvi
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