kisi soorat sehar nahin hoti | किसी सूरत सहर नहीं होती

  - Qamar Jalalvi
किसीसूरतसहरनहींहोती
रातइधरसेउधरनहींहोती
ख़ौफ़सय्यादसेबर्क़काडर
बातयेअपनेघरनहींहोती
एकवोहैंकिरोज़आतेहैं
एकहमहैंख़बरनहींहोती
अबमैंसमझाहूँकाटकरशब-ए-ग़म
ज़िंदगीमुख़्तसरनहींहोती
कितनीपाबंद-ए-वज़्अहैशब-ए-ग़म
कभीग़ैरोंकेघरनहींहोती
कितनीसीधीहैराह-ए-मुल्क-ए-अदम
हाजत-ए-राहबरनहींहोती
सुनलियाहोगातुमनेहाल-ए-मरीज़
अबदवाकार-गरनहींहोती
अर्शमिलताहैमेरीआहोंसे
लेकिनउनकोख़बरनहींहोती
  - Qamar Jalalvi
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