gair shaayaan-e-rasm-o-raah nahin | ग़ैर शायान-ए-रस्म-ओ-राह नहीं

  - Qalaq Merathi
ग़ैरशायान-ए-रस्म-ओ-राहनहीं
कबवो'आशिक़हैजोतबाहनहीं
फ़लकदौर-ए-हुस्नमेंउसके
तुझकोकुछफ़िक्र-ए-मेहर-ओ-माहनहीं
रब्त-ए-दुश्मनसेभीवोबद-बरहै
अबकिसीतरहसेनिबाहनहीं
कमनिगाहीकोउनकीदेखतेहैं
उनपेभीअबहमेंनिगाहनहीं
पर्दाकबतकरहेगाज़ालिम
अख़्तर-ए-मुद्दईसियाहनहीं
ज़ुल्मकीक़द्रकेलिएहैरहम
दादकुछबहर-ए-दाद-ख़्वाहनहीं
हैफ़क़ज़्ज़ाक़ी-ए-ज़मानाहैफ़
रस्म-ओ-रहबहर-ए-रस्म-ओ-राहनहीं
हैगदाशाहबल्किशाहंशाह
सतवत-ए-क़हर-ए-बादशाहनहीं
उल्फ़तऔरतुमसेहाएहाएहो
लब-ए-दुश्मनपेआहआहनहीं
पस्ती-ए-तालेअ'बहर-ए-ख़ूबी-ए-फ़न
क्यावोयूसुफ़जोग़र्क़-ए-चाहनहीं
अर्सा-ए-नीस्ती-ओ-हस्तीसे
बचकेचलनेकीकोईराहनहीं
'क़लक़'क्याहुआबुढ़ापेमेंइश्क़कुछसैर-ए-सुबह-गाहनहीं
  - Qalaq Merathi
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