deeda-e-surf-e-intizaar hai sham'a | दीदा-ए-सर्फ़-ए-इंतिज़ार है शम्अ

  - Qalaq Merathi
दीदा-ए-सर्फ़-ए-इंतिज़ारहैशम्अ
मेरीहालतकीयादगारहैशम्अ'
नहींदिलमेंकिसीकेसोज़-ओ-गुदाज़
कितमाशा-ए-रोज़गारहैशम्अ'
पए-जुम्बिशसदातड़पतीहै
तपिश-ए-ना-तवाँशिकारहैशम्अ'
रुख़-ए-रौशनहैनूर-ए-बीनाई
चश्म-ए-उश्शाक़काग़ुबारहैशम्अ'
रोज़-ए-तीरामेंबद-नुमाख़ुर्शीद
शब-ए-रौशनमेंतीरा-कारहैशम्अ'
याद-ए-गुल-रुख़सेफूलझड़तेहैं
किसबशाशतसेनौ-बहारहैशम्अ'
ख़ाकनासूर-ए-दिलभरेइसका
ज़ख़्मी-ए-गिर्या-हा-ए-ज़ारहैशम्अ'
हुस्नदीवानासबकोकरताहै
अपनेहीआपपरनिसारहैशम्अ'
सुब्हहोतेहीटिमटिमातीहै
आपकीचश्म-ए-पुर-ख़ुमारहैशम्अ'
क्यूँँरोएकिसतरहसेजले
किफ़ुग़ानी-ए-राज़-दारहैशम्अ'
नहींबुझतीलगीहुईजीकी
शाोला-ए-जान-ए-सोगवारहैशम्अ'
हैइधरदाग़-ए-बर्क़-ए-परवाना
औरउधरचश्म-ए-अब्र-बारहैशम्अ'
हुस्नभीहैमआल-ए-कारवबाल
बज़्म-दर-बज़्मक्याहैख़ारहैशम्अ'
झाँकनापर्देसेबुरीख़ूहै
ख़ुद-ब-ख़ुदआपशर्मसारहैशम्अ'
शब-ए-तन्हाईऔरतूऔरये
'क़लक़'तेरीग़म-गुसारहैशम्अ'
  - Qalaq Merathi
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