raaz-e-dil dost ko suna baithe | राज़-ए-दिल दोस्त को सुना बैठे

  - Qalaq Merathi
राज़-ए-दिलदोस्तकोसुनाबैठे
मुफ़्तमेंमुद्दईबनाबैठे
अंजुमनहैतिरीतिलिस्म-ए-रश्क
आश्नाहैंजुदाजुदाबैठे
कसरत-ए-सज्दासपशेमाँहैं
कितिरानक़्श-ए-पामिटाबैठे
कलजोताज-ओ-हशमकोछोड़उठे
आजवोतेरेदरपेबैठे
कीहैआख़िरकोनाश्ता-शिकनी
दाग़परदाग़हमतोखाबैठे
तर्ज़-ए-साक़ीसेदैरकेसबलोग
कररहेहैंख़ुदाख़ुदाबैठे
शाख़-ए-गुलकीनज़ाकतोंसेडरे
बारथेमुश्त-ए-परउड़ाबैठे
शिकवाआशिक़-कुशीकाफ़र्ज़था
यादयेक्याउन्हेंदिलाबैठे
दर्द-ए-सरथीदु'आमोहब्बतमें
हाथहमजानसेउठाबैठे
क़यामततूउठकेपूछमिज़ाज
हैंवोकुछआपहीख़फ़ाबैठे
रोएइतनेकिख़ूँहुईउम्मीद
ख़ुदजहाज़अपनाहमबहाबैठे
बे-तकल्लुफ़मक़ाम-ए-उल्फ़तहै
दाग़उट्ठेकिआबलाबैठे
आसमाँढहपड़ाउठेफ़ित्ने
जिसजगहलेकेमुद्दआ'बैठे
रस्म-ए-ताज़ीम-ए-इश्क़तोदेखो
दर्दउट्ठाकिजीमिराबैठे
'क़लक़'तुमसाबद-दिमाग़हैकौन
चर्ख़कीज़िदपेघरलुटाबैठे
  - Qalaq Merathi
Share

profile-whatsappprofile-twitterprofile-fbprofile-copy