khushi men bhi nava-sanj-e-fughaan hooñ | ख़ुशी में भी नवा-संज-ए-फ़ुग़ाँ हूँ

  - Qalaq Merathi
ख़ुशीमेंभीनवा-संज-ए-फ़ुग़ाँहूँ
ज़मीन-ओ-आसमाँकातर्ज़-दाँहूँ
मैंअपनीबे-निशानीकानिशाँहूँ
हुजूम-ए-मातम-ए-उम्र-ए-रवाँहूँ
तिरेजातेहीमेरीज़ीस्ततोहमत
नहींमिलतापताअपनाकहाँहूँ
ग़ुबार-ए-कारवान-ए-मोरहैज़ीस्त
येख़त्त-ए-यारसेआशुफ़्ता-जाँहूँ
नहींकुछकामबख़्त-ओ-आसमाँसे
मैंनाकामीमेंअपनीकामराँहूँ
नहींदममारनेकादमऔरउसपर
सरापाशम्अ'साँशक्ल-ए-ज़बाँहूँ
ख़ुदाहीगरदेमाशूक़-ओ-मयको
तोक्यूँँफिरमोहतसिबसेसरगिराँहूँ
वहाँकारंग-ए-पर्रांआसमाँहै
मैंजिसआलमकीतस्वीर-ए-गुमाँहूँ
कोईआवारामिलजाएतोपूछूँ
किधरसेआयाहूँजाताकहाँहूँ
निकलजाताहैजीहरआरज़ूपर
पए-ख़ून-ए-जवानीमेंजवाँहूँ
मिराग़मइशरत-ए-रफ़्ताकानग़्मा
किमिस्ल-ए-गर्दबू-ए-कारवाँहूँ
कवाकिब-हा-ए-क़िस्मतआसमाँपर
हूँक्यूँँनुक्ता-चींमैंनुक्ता-दाँहूँ
'क़लक़'बे-रौनक़ीरौनक़हैमेरी
बहार-ए-उम्र-ए-हस्तीकीख़िज़ाँहूँ
  - Qalaq Merathi
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