khat zameen par na ai fusoon-gar kaat | ख़त ज़मीं पर न ऐ फ़ुसूँ-गर काट

  - Qalaq Merathi
ख़तज़मींपरफ़ुसूँ-गरकाट
दर्द-ए-सरकाटनाहैतोसरकाट
गरलिखूँउसकोनामा-ए-उल्फ़त
हर्फ़-ए-मतलबकोदेमुक़द्दरकाट
क़त्लसेमेरेगरफिरेक़ातिल
दाँतसेलूँज़बान-ए-ख़ंजरकाट
गरहैबेदादहीपसंदतुझे
गर्दन-ए-ग़ैरसितम-गरकाट
ग़म-ए-बर्क़-ओ-तगर्गकोख़रीद
किश्त-ए-उम्मीदकोसरासरकाट
वक़्त-ए-दयज़ेर-ए-ख़ार-ज़ारगुज़ार
मौसम-ए-गुलतह-ए-गुल-ए-तरकाट
पा-ए-मर्दीसेदस्त-बुर्दछोड़
जेब-ए-शाह-ओ-गदाबराबरकाट
क़ुव्वत-ए-हज़्महैब-क़द्र-ए-ज़र्फ़
क्याकरेमौज-ए-आब-ए-गौहरकाट
सब्र-ओ-तस्लीमहीकेअंदररह
उम्ररंज-ओ-ख़ुशीसेबाहरकाट
तेग़-ए-बुर्रान-ए-वक़्तसेहरदम
रिश्ता-ए-आरज़ूकोयक-सरकाट
मतबनाघरचमनकेअंदरकाट
मतलगादिलगुल-ओ-सनोबरकाट
आशियाँकेलिएचमनकासे
मुर्ग़-ए-हिर्स-ओ-हवाकाहरपरकाट
क़दर-ए-आरामकुछतोकरमालूम
रोज़दुश्वाररातदूभरकाट
शर्तकुछतेग़बाँधनाहीनहीं
ज़ीस्तकोआएजोमुयस्सरकाट
'क़लक़'रंजहोकिहोआराम
काटजैसेकटेसुबुक-तरकाट
  - Qalaq Merathi
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