na pahunchen haath jis ka zof se taa-zeest daaman tak | न पहुँचे हाथ जिस का ज़ोफ़ से ता-ज़ीस्त दामन तक

  - Qalaq Merathi
पहुँचेहाथजिसकाज़ोफ़सेता-ज़ीस्तदामनतक
सुराग़-ए-ख़ूँअबइसकामरकेजाएख़ाकगर्दनतक
सर-ओ-सामाँसेहैंयेबे-सर-ओ-सामानियाँअपनी
किहैजोश-ए-जुनूँमेरागरेबाँ-गीरदामनतक
कीग़फ़लतसेक़द्र-ए-दिलअबसइल्ज़ामदिलबरपर
मता-ए-ख़ुफ़्ताकेजानेकेसौरस्तेहैंरहज़नतक
येहीलाभीनहींकममौतकेआनेकोगरआए
आएजोकिबालींपरवोक्याजाएगामदफ़नतक
कुछऐसाइख़्तिलातआपससेउट्ठाइसज़मानेमें
क़ातिलआएहैमुझतकजाएमौतदुश्मनतक
मिरीमेहनतकाज़ाएअ'होनाहीतोइकक़यामतहै
किबाद-ओ-बर्क़आफ़तमेंरहेंगेमेरेख़िर्मनतक
वफ़ाकीनज़्रहैमेरीहीजान-ए-हसरत-आलूदा
असरकीक़द्रहैमेरीहीआह-ए-क़ाफ़िला-ज़नतक
ग़ुबार-ए-दिलकिसीढबसेक़ातिलकाहुआसाबित
किसाफ़उसकीहवाकीतेग़मुझसेमेरेकुश्तनतक
मैंअपनेहौसलेसेऔरवोअपनेजा
मेंसेबाहर
ख़ंजरकाउसेखटकायाँसर्फ़ाहैगर्दनतक
नहींहोतारफ़ूचाक-ए-गरेबान-ए-फ़नाहरगिज़
मंगाईंचर्ख़-ए-चारुमसेअगरईसाकीसोज़नतक
गिराँ-जानीचमनमेंभीनिशानाहोगईआख़िर
किबार-ए-दोश-ए-गुलबनहैमिरीशाख़-ए-नशेमनतक
'क़लक़'मरताहैऔरहोताहैमातमकायेहंगामा
मगररोनाहैइसकातूआयाबज़्म-ए-शेवनतक
  - Qalaq Merathi
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