zindagi marg ki mohlat hi sahi | ज़िंदगी मर्ग की मोहलत ही सही

  - Qalaq Merathi
ज़िंदगीमर्गकीमोहलतहीसही
बहर-ए-वामांदाइक़ामतहीसही
दोस्तीवज्ह-ए-अदावतहीसही
दुश्मनीबहर-ए-रिफ़ाक़तहीसही
तूलदेतेहोअदावतकोक्यूँँ
मुख़्तसरक़िस्सा-ए-उल्फ़तहीसही
रखकिसीवज़्अ'सेएहसानकीख़ू
मुझकोआज़ारसेराहतहीसही
आपकाभीनहींछुटतादामन
मेरेदरपेमिरीशामतहीसही
आक़िबतहश्रकोआनाइकदिन
रूठजानातिरीआदतहीसही
कुछभीबख़्तमुयस्सरहैतुझे
यातजस्सुससेफ़राग़तहीसही
कूचा-ए-ग़ैरमेंचलकररहिए
गरनहींऐशतोहसरतहीसही
यहीतक़रीब-ए-सितमहोकाश
हरतरहग़ैरसेनफ़रतहीसही
अबतोउठआएलहदसेबे-ताब
सहीचालक़यामतहीसही
यादगारीकीकोईबाततोहो
मौतअपनीतिरीरुख़्सतहीसही
अदल-ओ-इंसाफ़-ए-क़यामतमालूम
आह-ओ-फ़रियादकीफ़ुर्सतहीसही
'क़लक़'शुक्र-ए-सितमबे-जाक्यूँँ
आह-ओ-फ़रियादकीफ़ुर्सतहीसही
  - Qalaq Merathi
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