tazaad-e-jazbaat men ye naazuk maqaam aaya to kya karoge | तज़ाद-ए-जज़्बात में ये नाज़ुक मक़ाम आया तो क्या करोगे

  - Qabil Ajmeri
तज़ाद-ए-जज़्बातमेंयेनाज़ुकमक़ामआयातोक्याकरोगे
मैंरोरहाहूँतुमहँसरहेहोमैंमुस्कुरायातोक्याकरोगे
मुझेतोइसदर्जावक़्त-ए-रुख़्सतसुकूँकीतल्क़ीनकररहेहो
मगरकुछअपनेलिएभीसोचामैंयादआयातोक्याकरोगे
अभीतोतन्क़ीदहोरहीहैमिरेमज़ाक़-ए-जुनूँपेलेकिन
तुम्हारीज़ुल्फ़ोंकीबरहमीकासवालआयातोक्याकरोगे
तुम्हारेजल्वोंकीरौशनीमेंनज़रकीहैरानियाँमुसल्लम
मगरकिसीनेनज़रकेबदलेजोदिलआज़मायातोक्याकरोगे
उतरतोसकतेहोयारलेकिनमआलपरभीनिगाहकरलो
ख़ुदा-ना-कर्दासुकून-ए-साहिलरासआयातोक्याकरोगे
कुछअपनेदिलपरभीज़ख़्मखाओमिरेलहूकीबहारकबतक
मुझेसहाराबनानेवालोमैंलड़खड़ायातोक्याकरोगे
अभीतोदामनछुड़ारहेहोबिगड़के'क़ाबिल'सेजारहेहो
मगरकभीदिलकीधड़कनोंमेंशरीकपायातोक्याकरोगे
  - Qabil Ajmeri
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