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Parvez Shaikh
alaalat men hua lipta badan tha
alaalat men hua lipta badan tha | अलालत में हुआ लिपटा बदन था
- Parvez Shaikh
अलालत
में
हुआ
लिपटा
बदन
था
किसी
की
ग़म-गुसारी
की
हैं
हमने
- Parvez Shaikh
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कुछ
इस
सलीक़े
से
माथे
पे
उसने
होंट
रखे
बदन
को
छोड़
के
सारी
थकन
को
चूम
लिया
Harsh saxena
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इसी
कारण
से
मैं
उसका
बदन
छूता
नहीं
यारों
मुझे
मालूम
है
क़िस्मत
में
वो
लिक्खा
नहीं
यारों
Harsh saxena
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बदन
के
दोनों
किनारों
से
जल
रहा
हूँ
मैं
कि
छू
रहा
हूँ
तुझे
और
पिघल
रहा
हूँ
मैं
Irfan Siddiqi
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इसीलिए
तो
हिफ़ाज़त
में
बैठा
रहता
हूँ
मेरे
बदन
में
कोई
नीम
जान
रहता
है
Nirmal Nadeem
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गुजर
चुकी
जुल्मते
शब-ए-हिज्र,
पर
बदन
में
वो
तीरगी
है
मैं
जल
मरुंगा
मगर
चिरागों
के
लो
को
मध्यम
नहीं
करूँगा
यह
अहद
लेकर
ही
तुझ
को
सौंपी
थी
मैंने
कलबौ
नजर
की
सरहद
जो
तेरे
हाथों
से
कत्ल
होगा
मैं
उस
का
मातम
नहीं
करूँगा
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Tehzeeb Hafi
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जिस्म
चादर
सा
बिछ
गया
होगा
रूह
सिलवट
हटा
रही
होगी
Kumar Vishwas
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हुस्न
बला
का
क़ातिल
हो
पर
आख़िर
को
बेचारा
है
इश्क़
तो
वो
क़ातिल
जिसने
अपनों
को
भी
मारा
है
ये
धोखे
देता
आया
है
दिल
को
भी
दुनिया
को
भी
इसके
छल
ने
खार
किया
है
सहरा
में
लैला
को
भी
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Jaun Elia
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वक़्त-ए-रुख़्सत
आब-दीदा
आप
क्यूँँ
हैं
जिस्म
से
तो
जाँ
हमारी
जा
रही
है
Azm Shakri
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सच
तो
ये
है
'मजाज़'
की
दुनिया
हुस्न
और
इश्क़
के
सिवा
क्या
है
Asrar Ul Haq Majaz
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जब
से
तूने
ये
बोला
था
"बदन
का
क्या
है
मिट्टी
है"
तब
से
तेरी
पीठ
पे
मुझको
हरसिंगार
उगाने
थे
Siddharth Saaz
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ख़ुशी
पर
हमारा
भी
हक़
था
मगर
यूँँ
ग़मों
ने
नहीं
दी
इजाज़त
कभी
भी
Parvez Shaikh
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हाथ
आया
न
कुछ
मिरे
अब
तो
शा'इरी
से
गुज़ारा
कैसे
करूँँ
Parvez Shaikh
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क्या
कहूँ
कुछ
कहा
भी
नहीं
जाता
है
बिन
तिरे
अब
रहा
भी
नहीं
जाता
है
ज़ख़्म
ऐसा
के
मरहम
कोई
भी
नहीं
मुझ
से
ये
सब
सहा
भी
नहीं
जाता
है
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Parvez Shaikh
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मदीने
की
गलियों
का
चक्कर
लगा
लूँ
मिले
आप
की
गर
शफ़ा'अत
कभी
भी
Parvez Shaikh
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आपके
दर्द
की
दु'आ
की
है
मौत
से
हमने
अब
वफ़ा
की
है
Parvez Shaikh
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