jo dil mira nahin mujhe us dil se kya garz | जो दिल मिरा नहीं मुझे उस दिल से क्या ग़रज़

  - Parveen Umm-e-Mushtaq
जोदिलमिरानहींमुझेउसदिलसेक्याग़रज़
चलनीहोजोराहतोमंज़िलसेक्याग़रज़
डूबूँगागरहैमेरेमुक़द्दरमेंडूबना
ग़व्वास-ए-बहर-ए-इश्क़कोसाहिलसेक्याग़रज़
वोदिलकोदेखताहैआमाल-ए-ज़ाहिरी
लैलाकेख़्वास्त-गारकोमहमिलसेक्याग़रज़
सुनताहैकौनआशिक़ोंकीआह-ओ-ज़ारियाँ
गोश-ए-चमनकोशोर-ए-अनादिलसेक्याग़रज़
हमउसकेशेफ़्ताहैंरक़ीबोंसेवास्ता
गुलसेग़रज़हैफ़ौज-ए-अनादिलसेक्याग़रज़
मरताहूँऔरजानहींसकतासू-ए-अदम
मुझना-तवाँकोतौक़-ओ-सलासिलसेक्याग़रज़
क्यूँँदर-पय-ए-तलाशहैंअहबाब-ओ-अक़रबा
'परवीं'शहीद-ए-नाज़कोक़ातिलसेक्याग़रज़
  - Parveen Umm-e-Mushtaq
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