mujh ko kya faaeda gar koi raha mire b'ad | मुझ को क्या फ़ाएदा गर कोई रहा मेरे ब'अद

  - Parveen Umm-e-Mushtaq
मुझकोक्याफ़ाएदागरकोईरहामेरेब'अद
सारीमख़्लूक़बलासेहोफ़नामेरेब'अद
मरचुकामैंतोनहींउससेमुझेकुछहासिल
बरसेगरपानीकीजाआब-ए-बक़ामेरेब'अद
चाहनेवालोंकाकरताहैज़मानामातम
मातमीरंगमेंहैज़ुल्फ़-ए-रसामेरेब'अद
रोएँगेमुझकोमिरेदोस्तसबआठआठआँसू
बरसेगीक़ब्रपेघनघोरघटामेरेब'अद
यूँँहीखिलतीरहेंगीसेहन-ए-चमनमेंकलियाँ
यूँँहीचलतीरहेगीबाद-ए-सबामेरेब'अद
जानदेनेकोउनपरकोईतय्यारहुआ
गोयाजाँ-बाज़ज़मानेमेंथामेरेब'अद
हाथसेउनकेटपकतेनहींमयकेक़तरे
अश्क-ए-ख़ूँरोताहैयेरंग-ए-हिनामेरेब'अद
हश्रतककोईरोकेगासितम-गारोंको
जोख़ुदापहलेथावोहीहैख़ुदामेरेब'अद
जीते-जीदेतेथेजोगालियाँमुझको'परवीं'
मग़फ़िरतकेलिएकरतेहैंदु'आमेरेब'अद
  - Parveen Umm-e-Mushtaq
Share

profile-whatsappprofile-twitterprofile-fbprofile-copy