badli hui hai charkh ki raftaar aaj-kal | बदली हुई है चर्ख़ की रफ़्तार आज-कल

  - Parveen Umm-e-Mushtaq
बदलीहुईहैचर्ख़कीरफ़्तारआज-कल
होबंदरास्त-गोईकाबाज़ारआज-कल
इल्म-ओ-हुनरहैमुल्ककोदरकारआज-कल
हमख़ुदभले-बुरेकेहैंमुख़्तारआज-कल
हैऔरहीतरीक़ा-ए-बाज़ारआज-कल
जिंस-ए-नफ़ीसकेहैंख़रीदारआज-कल
ग़फ़लतकादौरमुल्कसेशायदगुज़रगया
मख़्लूक़होतीजातीहैबेदारआज-कल
गुल-गूना-ए-तरक़्क़ी-तहज़ीब-ओ-अलमसे
शुक्र-ए-ख़ुदाकिसुर्ख़हैंरुख़्सारआज-कल
क्यूँँजानतेहैंसनअत-ओ-हिरफ़तकोबाग़-ए-ख़ुल्द
ग़ैरोंकीहमनिगाहमेंहैंख़ारआज-कल
रौशनहैअपनीबे-हुनरीआफ़्ताबसे
हैसुब्हकेक़रीबशब-ए-तारआज-कल
बिगड़ीहुईहैमय-कदा-ए-दहरकीहवा
होजाएँशैख़-जीभीमय-ख़्वारआज-कल
क्याकामइनसफ़ेदचुड़ैलोंकाहिन्दमें
क्यूँँऐसीशादियोंकीहैभर-मारआज-कल
हरचीज़कीगिरानीनेवीरानकरदिया
सर्फ़-ए-ख़िज़ाँहैहिन्दकागुलज़ारआज-कल
इसबाग़मेंहैबाद-ए-ख़िज़ाँबाद-ए-क़हत
हरगुलकेदिलमेंहैख़लिश-ए-ख़ारआज-कल
भूलेहैंअपनेफ़र्ज़कोयेख़्वाजगान-ए-हिन्द
हक़देनेमेंभीकरतेहैंइंकारआज-कल
शुक्र-ए-ख़ुदाकिज़ुल्मसेमअज़ूरहैफ़लक
बर्तानियाहैख़ल्क़कीग़म-ख़्वारआज-कल
यारबहमारेदिलकोतूअपनीपनाहदे
दिलदारहोगएहैंदिल-आज़ारआज-कल
मख़्सूसहोचुकीहैंइरादीग़ुलामियाँ
हैइकअनारसैकड़ोंबीमारआज-कल
एकएककरकेजितनेहुनरथेवोछिनगए
हमज़िंदगीसेक्यूँँहोंबेज़ारआज-कल
इकजुर्मऔरफ़र्द-ए-जराएममेंबढ़गया
यानीदर्द-ए-दिलकाहोइज़हारआज-कल
जीनेकीफ़िक्रकीजिएऔरपेटकाख़याल
मौक़ूफ़कीजेइश्क़काआज़ारआज-कल
पाबंदियाँभीचाहिएँइंसानकोज़रूर
आज़ादियोंकीक्यूँँहैयेभर-मारआज-कल
मिलतानहींकहींदहन-ए-यारहैअनाज
फ़ाक़ोंसेजिस्महैकमर-ए-यारआज-कल
हैतंग-दस्तियोंकेसबबज़ोफ़इसक़दर
सबकीहैंआँखेंनर्गिस-ए-बीमारआज-कल
लाखोंमुहालअक़लीआदीसहीमगर
कस्ब-ए-मआशसबसेहैदुश्वारआज-कल
क्याकीजेतरनिवालोंकामौसमनहींरहा
चिपकेहुएहैंयारकेरुख़्सारआज-कल
फ़ाक़ोंसेहैयेहालअगरतोलकरबिठाएँ
आधेटिकटमेंजाएतन-ए-ज़ारआज-कल
गुलकरदियाचराग़-ए-मईशततूहवा
मेदाकेभीघिसगएक्यूँँख़ारआज-कल
चारोंतरफ़बुलंदहैफ़रियादहाएहाए
मातम-कदाहैक़हक़ा-ए-दीवारआज-कल
दौलतजबआएगीकिवहीचीज़हमबनाएँ
जोचीज़चाहतेहोंख़रीदारआज-कल
बेहतरहैकार-ख़ानोंसेहोमुल्ककाभला
उगलेंगड़ेख़ज़ानोंकोज़रदारआज-कल
सनअतकानामगंजहैहिरफ़तकानामज़र
इल्म-ए-शिकमहैमुल्ककोदरकारआज-कल
'परवीं'कीयेदु'आहैरहेअम्नमुल्कमें
रब्ब-ए-ग़फ़ूरतूहीहैग़म-ख़्वारआज-कल
  - Parveen Umm-e-Mushtaq
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