nargisiin aankh bhi hai abroo-e-khandaar ke paas | नर्गिसीं आँख भी है अबरू-ए-ख़मदार के पास

  - Parveen Umm-e-Mushtaq
नर्गिसींआँखभीहैअबरू-ए-ख़मदारकेपास
दूसरीऔरभीतलवारहैतलवारकेपास
दुश्मनोंकामिरीक़िस्मतसेहैक़ाबूमुझपर
यारकेपासहैदिलयारहैअग़्यारकेपास
यादरखनाजोहुईवादा-ख़िलाफ़ीउनकी
बिस्तराआनजमेगातिरीदीवारकेपास
क़ैदी-ए-ज़ुल्फ़कीक़िस्मतमेंहैरुख़्सारकीसैर
शुक्रहैबाग़भीहैमुर्ग़-ए-गिरफ़्तारकेपास
चेहराभीबर्क़भीदिललेनेमेंगेसूभीबला
एकसामोजज़ाहैकाफ़िरदीं-दारकेपास
ग़ैरबे-जुर्महैंऔरमैंहूँवफ़ाकामुजरिम
कौनआताभलामुझसेगुनहगारकेपास
क़ब्रमेंसोएँगेआरामसेअबब'अद-ए-फ़ना
आएगाख़्वाब-ए-अदमदीदा-ए-बेदारकेपास
उसकीक्यावज्हमिरेहोतेवहाँक्यूँँरहें
क्यूँँरहेज़ुल्फ़-ए-सियहआपकेरुख़्सारकेपास
होशियारीसेहो'परवीं'चमन-ए-हुस्नकीसैर
दामऔरदानाहैंदोनोंरुख़-ए-दिलदारकेपास
  - Parveen Umm-e-Mushtaq
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