bahut din dars-e-ulfat men kate hain | बहुत दिन दर्स-ए-उल्फ़त में कटे हैं

  - Parveen Umm-e-Mushtaq
बहुतदिनदर्स-ए-उल्फ़तमेंकटेहैं
मोहब्बतकेसबक़बरसोंरटेहैं
जुनूँमेंहोगयाहैअबयेदर्जा
किहैहालतरदीकपड़ेफटेहैं
हरमसेवापसीपरमेरीदावत
हुईमय-ख़ानेमेंमय-कशडटेहैं
बहुतपीर-ए-मुग़ाँज़ी-हौसलाहै
शराब-ए-नाबकेसाग़रलुटेहैं
रियाज़ज़ोहदकेजितनेथेधब्बे
वोसारेनक़्श-ए-बातिलअबमिटेहैं
तबर्रुकथेमिरीतौबाकेटुकड़े
बजाएनक़्लमहफ़िलमेंबटेहैं
अलमकेदर्दकेहसरतकेग़मके
मज़ेजितनेहैंसारेचटपटेहैं
नहींबे-वजहवाइज़रोनीसूरत
येहज़रतआजरिंदोंमेंपिटेहैं
हुएजारूब-कशउसदरके'परवीं'
किसारेगर्दमिट्टीमेंअटेहैं
  - Parveen Umm-e-Mushtaq
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