ek na ik deewaar sarkati rahtii hai | एक न इक दीवार सरकती रहती है

  - Parveen Kumar Ashk
एकइकदीवारसरकतीरहतीहै
घरकीछतहररुतमेंटपकतीरहतीहै
जिस्ममिराशहरोंमेंहँसतागाताहै
रूहमिरीजंगलमेंसिसकतीरहतीहै
तितलीप्यारकरेकाग़ज़केफूलोंसे
ख़ुशबूसहराओंमेंभटकतीरहतीहै
भीड़मेंभीइकचाँदचमकतारहताहै
शहरमेंभीपायलसीछनकतीरहतीहै
चारोंओरकेख़ालीमंज़रमेंहरसाँस
आँखमिरीतिरीसूरततकतीरहतीहै
जंगलड़ेबरसोंगुज़रेलेकिनअबभी
सरपेमिरेतलवारचमकतीरहतीहै
बर्फ़तोदूरपहाड़ोंपरगिरतीहै'अश्क'
आगमिरीवादीमेंदहकतीरहतीहै
  - Parveen Kumar Ashk
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