seene par rakh hijrat ka patthar chup-chaap | सीने पर रख हिजरत का पत्थर चुप-चाप

  - Parveen Kumar Ashk
सीनेपररखहिजरतकापत्थरचुप-चाप
घरमेंरहऔरछोड़देअपनाघरचुप-चाप
चीख़चीख़करमौजेंमुझेबुलातीथीं
मैंडूबातोबैठगयासागरचुप-चाप
मैंसहराकेबंदमकाँमेंरहताहूँ
ख़ुशबूकहाँसेआतीहैअंदरचुप-चाप
गोरा-चट्टारूपवोकालाजादूथा
मुझपरफूँककेभागगयामंतरचुप-चाप
मैंनेअपनासीनाचीरकेदिखलाया
लौटगएक्यूँँदर्दकेसौदागरचुप-चाप
मेरेआँसूपीनेशामकोइकचिड़िया
मेरीगोदमेंबैठेउड़करचुप-चाप
इकतन्हाहै'अश्क'जोबोलेजाताहै
सबअंदरख़ामोशहैंसबबाहरचुप-चाप
  - Parveen Kumar Ashk
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