ahl-e-gham aao zaraa sair-e-gulistaan kar len | अहल-ए-ग़म आओ ज़रा सैर-ए-गुलिस्ताँ कर लें

  - Parveen Fana Syed
अहल-ए-ग़मआओज़रासैर-ए-गुलिस्ताँकरलें
गरख़िज़ाँहैतोचलोशग़्ल-ए-बहाराँकरलें
फिरतोहरसम्तअँधेराहीअँधेराहोगा
पौफटीहैतोलुटीबज़्मचराग़ाँकरलें
दिलकीवीरानियाँआँखोंमेंउड़ातीहैंग़ुबार
मिलकेरोलेंतोकुछउनकोभीफ़रोज़ाँकरलें
क़हक़होंसेतोघुटनऔरभीबढ़जाएगी
आओचुपरहकेहीइसदर्दकादरमाँकरलें
शायदइसतरहबगूलोंकागुज़रमुमकिनहो
अपनेवीरानेकोकुछऔरभीवीराँकरलें
हमजोज़िंदाहैंतोसबकहतेहैंक्यूँँज़िंदाहैं
आओमरकरभीमसीहाओंकोहैराँकरलें
  - Parveen Fana Syed
Share

profile-whatsappprofile-twitterprofile-fbprofile-copy