us garmi-e-baazaar se badh kar nahin kuchh bhi | उस गर्मी-ए-बाज़ार से बढ़ कर नहीं कुछ भी

  - Partav Rohila
उसगर्मी-ए-बाज़ारसेबढ़करनहींकुछभी
सचजानिएदुक्कानकेअंदरनहींकुछभी
हमजोहद-ए-मुसलसलसेजहाँटूटकेगिरजाएँ
वोलम्हाहक़ीक़तहैमुक़द्दरनहींकुछभी
मजबूरतजस्सुसनेकियाहैहमेंवर्ना
इसक़ैदकीदीवारकेबाहरनहींकुछभी
येमेरीतमन्नाहैकिजुम्बिशमेंहैंपर्दे
इकख़्वाहिश-ए-पैहमहैपस-ए-दरनहींकुछभी
अफ़्कारकीअक़्लीमविरासतहैहमारी
औरइसकेसिवाहमकोमुयस्सरनहींकुछभी
दरवेशभीहोतेहुएहमऐसेग़नीहैं
दाराई-ए-दुनिया-ए-सिकंदरनहींकुछभी
जिसतख़्त-ए-ग़िनापरमुतमक्किनहूँमैं'परतव'
उसदौलत-ए-बेहदकेबराबरनहींकुछभी
  - Partav Rohila
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