zard pedon pe shaam hai giryaa | ज़र्द पेड़ों पे शाम है गिर्यां

  - Parkash Fikri
ज़र्दपेड़ोंपेशामहैगिर्यां
जीउदासीकेदश्तमेंहैराँ
नीम-रौशनसियाहियाँहरसू
औरहवाएँसुकूतपरख़ंदाँ
ठहरेपानीकेसर्दशीशेमें
गुज़रेमौसमकेअक्सहैंलर्ज़ां
सबकेहोंटोंपेजमगईंबातें
सबकीआँखोंमेंरातनौहा-ख़्वाँ
रब्तरिश्तोंकेरंगहैंफीके
ख़्वाबक़िस्सेकहानियाँबे-जाँ
जोथारस्तेकीरौशनी'फ़िक्री'
वोभीनज़रोंसेहोगयापिन्हाँ
  - Parkash Fikri
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