saath dariyaa ke ham bhi jaayen kya | साथ दरिया के हम भी जाएँ क्या

  - Parkash Fikri
साथदरियाकेहमभीजाएँक्या
ज़ोर-लहरोंकाआज़माएँक्या
पेड़सारेउजड़चुकेकबके
शोरकरतीहैंफिरहवाएँक्या
कबवोगुज़रेगीइसख़राबेसे
फ़स्ल-ए-गुलसेयेपूछआएँकिया
फूलबाग़ोंमेंजबनहींखिलते
फूलगमलोंमेंहमखिलाएँक्या
रातजंगलकीशहरमेंआई
घरचराग़ोंसेजगमगाईंक्या
जोख़ुदाहैकभीतोसोचेवो
एकदुनियानईबनाईंक्या
ख़ौफ़कैसाहैशामसे'फ़िक्री'
आजउतरेंगीफिरबुलाएँक्या
  - Parkash Fikri
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