kahaan kahaan se guzar raha hooñ | कहाँ कहाँ से गुज़र रहा हूँ

  - Parkash Fikri
कहाँकहाँसेगुज़ररहाहूँ
मैंआँधियोंमेंबिखररहाहूँ
किसीभीसूरतचैनपाऊँ
येकिसतजस्सुसमेंमररहाहूँ
मैंसुर्ख़ियोंमेंकहाँसेहोता
मैंहाशिएकीख़बररहाहूँ
सभोंकोजानाहैपारलेकिन
मैंपारजानेसेडररहाहूँ
मेरीमंज़िलकोईजादा
अज़लसेगर्द-ए-सफ़ररहाहूँ
मुझेतोमरनाथाग़ममें'फ़िक्री'
मैंग़ममेंजलकरनिखररहाहूँ
  - Parkash Fikri
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