kaali raaton men faseel-e-dard unchi ho gaii | काली रातों में फ़सील-ए-दर्द ऊँची हो गई

  - Parkash Fikri
कालीरातोंमेंफ़सील-ए-दर्दऊँचीहोगई
अंधीगलियोंमेंख़मोशीलाशबनकेसोगई
बर्फ़सेठंडेअँधेरोंकीसिसकतीगोदमें
मरतेलम्होंकीउदासीदिलमेंकाँटेबोगई
शहरकीसोतीछतेंहोंयाफ़सुर्दारास्ते
क़तराक़तरागिरतीशबनमसबकाचेहराधोगई
नींदमेंडूबेशजरसेचीख़तेपंछीउड़े
ख़ौफ़केमारेहवामेंकपकपीसीहोगई
इसअकेले-पनकेहाथोंहमतो'फ़िक्री'मरगए
वोसदाजोढूँडतीथीजंगलोंमेंखोगई
  - Parkash Fikri
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