hawa se ujad kar bikhar kyun ga.e | हवा से उजड़ कर बिखर क्यूँँ गए

  - Parkash Fikri
हवासेउजड़करबिखरक्यूँँगए
वोपत्तेजोसरसब्ज़शाख़ोंपेथे
हरीघासकिसकेलहूसेजली
वोतितलीकेरंगीनपरक्याहुए
नहींकोईचिड़ियाकिसीडालपर
दरख़्तोंपेमकड़ीनेजालेबुने
दरीचोंकेशीशोंकादिलतोड़कर
मकाँख़ालीरूहोंकेमस्कनबने
हैख़बरोंकेचेहरोंपेवहशतबहुत
मैंदेखूँजोउनकोमिराजीडरे
जोआँखोंकी'फ़िक्री'हँसीछीनलें
वोकिसतीराजंगलकेहैंभेड़िये
  - Parkash Fikri
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