vo raabte bhi anokhe jo dooriyaan barten | वो राब्ते भी अनोखे जो दूरियाँ बरतें

  - Parkash Fikri
वोराब्तेभीअनोखेजोदूरियाँबरतें
वोक़ुर्बतेंभीनिरालीजोलम्सकोतरसें
सवालबनकेसुलगतेहैंरातभरतारे
कहाँहैनींदहमारीवोबसयहीपूछें
बुलातारहताहैजंगलहमेंबहानोंसे
सुनेंजोउसकीतोशायदफिरकभीलौटें
फिसलतीजातीहैहाथोंसेरेतलम्होंकी
कहाँहैबसमेंहमारेकिहमउसेरोकें
हक़ीक़तोंकाबदलनातोख़्वाबहै'फ़िक्री'
मगरयेख़्वाबहैऐसाकिसबजिसेदेखें
  - Parkash Fikri
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