chaand ki apni kahaanii raat ka qissa alag | चाँद की अपनी कहानी रात का क़िस्सा अलग

  - Pankaj Subeer
चाँदकीअपनीकहानीरातकाक़िस्साअलग
दास्तान-ए-इश्क़मेंहैतजरबासबकाअलग
अजनबीहमआजसेहैंपरसफ़रतोहैवही
सिर्फ़कहदेनेसेहोताहैकहींरस्ताअलग
एकलम्हाबसवहीहैऔरबाक़ीकुछनहीं
ज़िंदगीसारीअलगऔरवस्लकालम्हाअलग
रौशनीदीपककीसूरजचाँदकीअपनीजगह
नूरसेरौशनतिरेमाथेकायेटीकाअलग
इश्क़केबीमारपरसारीदवाएँबे-असर
चारा-गरउसकीदवाकाहैज़रानुस्ख़ाअलग
चलतेचलतेआपनेदेखाथाहमकोबसयूँँही
शहरमेंउसदिनसेअपनाहोगयारुत्बाअलग
  - Pankaj Subeer
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