tumhaara gham na ho to zindagi achchhii nahin lagti | तुम्हारा ग़म न हो तो ज़िंदगी अच्छी नहीं लगती

  - Pankaj Subeer
तुम्हाराग़महोतोज़िंदगीअच्छीनहींलगती
ख़मोशीसेबहेजोवोनदीअच्छीनहींलगती
पड़ेहोइश्क़मेंतोइश्क़कीतहज़ीबभीसीखो
किसी'आशिक़केचेहरेपरहँसीअच्छीनहींलगती
येमनकरताहैबादलकेढकलेंचाँदकोपूरा
होंजबवोपासतोफिरचाँदनीअच्छीनहींलगती
कहाउसनेहमेंकबवस्लसेइंकारहैलेकिन
ख़लिशसीनेमेंउसकेबा'दकीअच्छीनहींलगती
अजबहैबातहैरतकीहमारीशक्लयेउनको
कभीलगतीहैअच्छीऔरकभीअच्छीनहींलगती
लिखीहैंसारीग़ज़लेंबसउसीकेवास्तेमैंने
वहीहाँवोहीजिसकोशाइ'रीअच्छीनहींलगती
  - Pankaj Subeer
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