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Jaun Elia
jaaniye us se nibhegi kis tarah
jaaniye us se nibhegi kis tarah | जानिए उस से निभेगी किस तरह
- Jaun Elia
जानिए
उस
से
निभेगी
किस
तरह
वो
ख़ुदा
है
मैं
तो
बंदा
भी
नहीं
- Jaun Elia
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वक़्त
ए
इफ़्तार
ख़ुद
रब
था
मेरे
क़रीब
तुझ
से
बढ़
कर
मगर
कुछ
न
माँगा
गया
Afzal Ali Afzal
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मैं
हूँ
सदियों
से
भटकता
हुआ
प्यासा
दरिया
ऐ
ख़ुदा
कुछ
तो
समुंदर
के
सिवा
दे
मुझ
को
Afzal Ali Afzal
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तेरी
ख़ातिर
ख़ुदास
हम
दु'आ
करते
नहीं
करते
भला
हम
और
क्या
करते
Arohi Tripathi
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जिस
ने
इस
दौर
के
इंसान
किए
हैं
पैदा
वही
मेरा
भी
ख़ुदा
हो
मुझे
मंज़ूर
नहीं
Hafeez Jalandhari
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मुहब्बत
में
हमने
सियासत
न
की
तभी
इश्क़
में
कोई
बरकत
न
की
उसे
मानता
था
मैं
अपना
ख़ुदा
कभी
उसकी
लेकिन
इबादत
न
की
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RAJAT AWASTHI
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ऐ
आसमान
तेरे
ख़ुदा
का
नहीं
है
ख़ौफ़
डरते
हैं
ऐ
ज़मीन
तेरे
आदमी
से
हम
Unknown
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पहले
पानी
को
और
हवा
को
बचाओ
ये
बचा
लो
तो
फिर
ख़ुदा
को
बचाओ
Swapnil Tiwari
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मैं
उस
से
ये
तो
नहीं
कह
रहा
जुदा
न
करे
मगर
वो
कर
नहीं
सकता
तो
फिर
कहा
न
करे
वो
जैसे
छोड़
गया
था
मुझे
उसे
भी
कभी
ख़ुदा
करे
कि
कोई
छोड़
दे
ख़ुदा
न
करे
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Tehzeeb Hafi
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ख़ुदा
ख़ुदको
समझते
हो
तो
समझो
मगर
इक
रोज़
मर
जाना
है
तुमको
Shakeel Azmi
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ख़ुदा
बचाए
तिरी
मस्त
मस्त
आँखों
से
फ़रिश्ता
हो
तो
बहक
जाए
आदमी
क्या
है
Khumar Barabankvi
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मुझ
से
अब
लोग
कम
ही
मिलते
हैं
यूँँ
भी
मैं
हट
गया
हूँ
मंज़र
से
Jaun Elia
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कितने
ऐश
से
रहते
होंगे
कितने
इतराते
होंगे
जाने
कैसे
लोग
वो
होंगे
जो
उस
को
भाते
होंगे
Jaun Elia
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जान-लेवा
थीं
ख़्वाहिशें
वर्ना
वस्ल
से
इंतिज़ार
अच्छा
था
Jaun Elia
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किस
से
इज़हार-ए-मुद्दआ
कीजे
आप
मिलते
नहीं
हैं
क्या
कीजे
हो
न
पाया
ये
फ़ैसला
अब
तक
आप
कीजे
तो
क्या
किया
कीजे
आप
थे
जिस
के
चारा-गर
वो
जवाँ
सख़्त
बीमार
है
दु'आ
कीजे
एक
ही
फ़न
तो
हम
ने
सीखा
है
जिस
से
मिलिए
उसे
ख़फ़ा
कीजे
है
तक़ाज़ा
मिरी
तबीअ'त
का
हर
किसी
को
चराग़-पा
कीजे
है
तो
बारे
ये
आलम-ए-असबाब
बे-सबब
चीख़ने
लगा
कीजे
आज
हम
क्या
गिला
करें
उस
से
गिला-ए-तंगी-ए-क़बा
कीजे
नुत्क़
हैवान
पर
गराँ
है
अभी
गुफ़्तुगू
कम
से
कम
किया
कीजे
हज़रत-ए-ज़ुल्फ़-ए-ग़ालिया-अफ़्शाँ
नाम
अपना
सबा
सबा
कीजे
ज़िंदगी
का
अजब
मोआ'मला
है
एक
लम्हे
में
फ़ैसला
कीजे
मुझ
को
आदत
है
रूठ
जाने
की
आप
मुझ
को
मना
लिया
कीजे
मिलते
रहिए
इसी
तपाक
के
साथ
बे-वफ़ाई
की
इंतिहा
कीजे
कोहकन
को
है
ख़ुद-कुशी
ख़्वाहिश
शाह-बानो
से
इल्तिजा
कीजे
मुझ
से
कहती
थीं
वो
शराब
आँखें
आप
वो
ज़हर
मत
पिया
कीजे
रंग
हर
रंग
में
है
दाद-तलब
ख़ून
थूकूँ
तो
वाह-वा
कीजे
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Jaun Elia
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पड़ी
रहने
दो
इंसानों
की
लाशें
ज़मीं
का
बोझ
हल्का
क्यूँँ
करें
हम
Jaun Elia
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