pi.e jaata hooñ saaqi ki nazar se | पिए जाता हूँ साक़ी की नज़र से

  - Pandit Vidya Rattan Asi
पिएजाताहूँसाक़ीकीनज़रसे
मुझेक्यागर्दिश-ए-शाम-ओ-सहरस
मुनासिबहैग़ुरूर-ए-हुस्नलेकिन
उतरजाएगासौदाभीयेसरसे
येकिनबीतेदिनोंकीयादआई
येकैसेअश्कटपकेचश्म-ए-तरसे
बहुतमश्शाक़होगारहज़नीमें
किसेथीयेतवक़्क़ोराहबरसे
सितमढाकरहमारेदिलपेअक्सर
ज़मानाख़ुदगिराअपनीनज़रसे
तिरेजलवोंकीताबानीकाआलम
कोईदेखेज़रामेरीनज़रमें
किसीकीमस्तआँखोंकेतसद्दुक़
यक़ींउठनेलगाहैमौतपरसे
तुम्हेंचाहूँतोकिसबूतेपेचाहूँ
तुम्हेंदेखूँतोदेखूँकिसनज़रसे
क़दमरक़्साँजहाँआलमजुनूँने
कोईतूफ़ाँउठेइसरहगुज़रसे
बहुतबिगड़ेहुएहैंउनकेतेवर
नज़रआताहैयेउनकीनज़रसे
भरीमहफ़िलमेंइज़हार-ए-मोहब्बत
येलग़्ज़िशऔरफिरमेरीनज़रसे
उठाएमौतहीफिरउनको'आसी'
गिरादेतेहैंवोजिनकोनज़रसे
  - Pandit Vidya Rattan Asi
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