kyuuñ na ham aaj haqeeqat hi bataa den apni | क्यूँ न हम आज हक़ीक़त ही बता दें अपनी

  - Pandit Vidya Rattan Asi
क्यूँहमआजहक़ीक़तहीबतादेंअपनी
जिस्मअपनाहीइसजिस्ममेंसाँसेंअपनी
सचतोयेहैकिकभीख़ुदकोतलाशाहीथा
औरआईभीथींबरसोंसेयादेंअपनी
बोझइसदिलकाकिसीरोज़तोहल्काहोगा
खुलकेबरसेंगीकिसीरोज़तोआँखेंअपनी
अबयेआलमहैहमइकदूजेकोसुनलेतेहैं
औरख़ामोशभीरखतेहैंज़बानेंअपनी
जानेकिसवक़्तहोअंदरकेसफ़रकाआग़ाज़
जानेकबख़त्महोंबाहरकीयेदौड़ेंअपनी
मुझकोपहलेहीसेइरफ़ानकाहैनश्शाबहुत
मेरेआगेसेहटालोयेशराबेंअपनी
अबतोहरसम्तनज़रआताहैजल्वाअपना
अबतोजिससम्तभीउठतीहैंनिगाहेंअपनी
आइनाआइनाहैआपकोक्यादेखेगा
देखसकतीहैंकहाँख़ुदकोनिगाहेंअपनी
रूहकीप्यासहैलफ़्ज़ोंसेकहाँबुझतीहै
बंदकरदोयेसहीफ़ेयेकिताबेंअपनी
एकतूहीतोसमझसकताहै'आसी'वर्ना
कौनसमझेगातिरेशहरमेंबातेंअपनी
  - Pandit Vidya Rattan Asi
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