kabhi ranj-o-gham to kabhi be-kasi hai | कभी रंज-ओ-ग़म तो कभी बे-कसी है

  - Pandit Vidya Rattan Asi
कभीरंज-ओ-ग़मतोकभीबे-कसीहै
मिरीज़िंदगीभीअजबज़िंदगीहै
गिलाक्याकरूँँउनकेज़ोर-ओ-सितमका
हमेशासेउनकीयेआदतरहीहै
मोहब्बतमेंजीनामोहब्बतमेंमरना
मिरीज़िंदगीकाअक़ीदायहीहै
हुआक्याहैआख़िरहमेंभीपताहो
भलाहमसेक्यूँआजयेबे-रुख़ीहो
अगरचेग़म-ए-दहरकासामनाहै
मगरमेरेहोंटोंपेफिरभीहँसीहै
बयाँक्याकरूँँकैफ़ियतदिलकी'आसी'
मोहब्बतमेंअबजानपरबनीहै
  - Pandit Vidya Rattan Asi
Share

profile-whatsappprofile-twitterprofile-fbprofile-copy