baithe ho sar-e-raahguzar kyuuñ nahin jaate | बैठे हो सर-ए-राहगुज़र क्यूँ नहीं जाते

  - Pandit Vidya Rattan Asi
बैठेहोसर-ए-राहगुज़रक्यूँनहींजाते
तुमलोगतोघरवालेहोघरक्यूँनहींजाते
येवक़्तकेहाकिमहैंसुनावक़्तकेहाकिम
येकहतेहैंमरजाओतोमरक्यूँनहींजाते
इसबातसेज़ाहिरहैतुम्हींएकख़ुदाहो
हमवर्नाकिसीऔरकेदरक्यूँनहींजाते
पलहीमेंगुज़रजातीहैसुख-चैनकीरातें
दुख-दर्दकेदिनपलमेंगुज़रक्यूँनहींजाते
मुद्दतसेकुरेदेभीनहींयादकिसीकी
फिरज़ख़्ममिरेसीनेकेभरक्यूँनहींजाते
इसदौरमेंजीनाहैतोमक्कारकाजीना
येबातहक़ीक़तहैतोमरक्यूँनहींजाते
इतनेहीअगरतंगहोइसशहरस'आसी'
चुपकेसेकिसीदूरनगरक्यूँनहींजाते
  - Pandit Vidya Rattan Asi
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